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समाजकारण /राजकारण

अन्नपूर्णा महाराणा...

         


          *अन्नपूर्णा महाराणा*

     (ओडिया स्वतंत्रता सेनानी)


    *जन्म : 3 नवम्बर 1917*

             (ओडिसा, भारत)


    *मृत्यु : 31 दिसम्बर 2012*

                   (उम्र 95)

        (कटक, ओडिसा, भारत)


राष्ट्रीयता : भारतीय

प्रसिद्धि कारण : स्वतंत्रता सेनानी,  

                  सामाजिक कार्यकर्ता

जीवनसाथी : शरत चंद्र महाराणा

बच्चे : कर्मदेव महाराणा, 

          ज्ञानदेव महाराणा


                      अन्नपूर्णा महाराणा भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय स्वतंत्रता सेनानी थी। इसके अलावा वह एक प्रमुख सामाजिक और महिला अधिकार कार्यकर्ता भी थीं।अन्नपूर्णा, महात्मा गांधी के करीबी सहयोगी थी|


💁 *जीवनकाल*


अन्नपूर्णा महाराणा का जन्म 3 नवंबर 1917 को ओडिशा में राम देवी और गोपाबंधू चौधरी के दूसरे बच्चे के रूप में हुआ था। उनके दोनों माता-पिता भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय थे। इन्होंने चौदह वर्ष की उम्र से ही स्वतंत्रता के लिए सक्रिय रूप से प्रचार करना शुरू किया, और महात्मा गांधी की समर्थक बन गई। 1934 में, वह महात्मा गांधी के पुरी से भद्रक तक के "हरिजन पडा यात्रा" रैली में ओडिशा से जुड़ गईं। अगस्त 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन, सविनय अवज्ञा अभियान के दौरान सहित महाराणा को कई बार गिरफ्तार किया गया था।


स्वतंत्रता के बाद, महाराणा ने भारत में महिलाओं और बच्चों की ओर से आवाज बनी। उन्होंने क्षेत्र की जनजातीय आबादी के बच्चों के लिए ओडिशा के रायगडा जिले में एक स्कूल खोला। महाराणा, विनोबा भावे द्वारा शुरू किया गये भूदान आन्दोलन, या भूमि उपहार आंदोलन का भी हिस्सा बनी। उन्होंने चंबल घाटी के सक्रिय डकैतो को मुख्य धारा में लौटने के लिए अभियान चलाया।


आपातकाल के दौरान उन्होंने रामदेवी चौधरी के ग्राम सेवा प्रेस द्वारा प्रकाशित अख़बार की मदद से विरोध जताया। सरकार द्वारा समाचार पत्र पर प्रतिबंध लगा कर रामदेवी चौधरी और उड़ीसा के अन्य नेताओं जैसे नाबक्रुश्ना चौधरी, हरिकेष्णा महाबत, मनमोहन चौधरी, जयकृष्ण मोहंती और अन्य के साथ उन्हें गिरफ्तार किया गया था।


ओडिशा के केंद्रीय विश्वविद्यालय ने 19 अगस्त 2012 को अपने कटक घर में आयोजित एक समारोह में महाराणा को ऑनोरिस कौसा (मानद उपाधि) से सम्मानित किया।


🪔 *निधन*                                              31 दिसंबर 2012 को, 96 वर्ष की उम्र में बखराबाद, कटक, ओडिशा के अपने घर पर लंबी बीमारियों जुझने के बाद उनकी मृत्यु हो गई। । 2 जनवरी 2013 को कटक के खन्नागर श्मशान में उन्हें सम्मान के साथ उनका दाह-संस्कार किया गया।


ओडिशा के राज्यपाल मुरलीधर चंद्रकांत भंडारी और मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने उनकी मृत्यु को भारत और ओडिशा की "अपूरणीय हानि" के रूप में वर्णित किया था।

  

         


कृष्ण बल्लभ सहाय...



              *कृष्ण बल्लभ सहाय*  

     (स्वतंत्रता सेनानी तथा राजनेता)

             *जन्म : 31 दिसम्बर, 1866*

                  (पटना, बिहार)

            *मृत्यु : 3 जून, 1974*

                 (हजारीबाग, झारखण्ड)

नागरिकता : भारतीय

आंदोलन : असहयोग आन्दोलन, किसान आन्दोलन, सविनय अवज्ञा आन्दोलन

कार्य काल : मुख्यमंत्री, बिहार- 2 अक्टूबर 1963 से 5 मार्च 1967 तक

विद्यालय : सेंट कोलम्बा कॉलेज़, हजारीबाग

पार्टी : भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

अन्य जानकारी : के. बी. सहाय ने बिहार में मंत्रीय पद प्राप्त किया और सन 1963 में बिहार के मुख्यमंत्री नियुक्त हुए।

                    कृष्ण बल्लभ सहाय भारत के सुप्रसिद्ध राष्ट्रभक्त एवं क्रांतिकारी थे, जो बाद में पहले बिहार के राजस्व मंत्री और फिर संयुक्त बिहार के मुख्यमंत्री भी बने। के. बी. सहाय भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़े थे। वह 2 अक्टूबर 1963 से 5 मार्च 1967 तक मुख्यमंत्री पद पर रहे।

💁🏻‍♂️ *परिचय*

कृष्ण बल्लभ का जन्म बिहार के पटना ज़िले में सेखपुर नामक गांव में 31 दिसम्बर, 1898 में हुआ था। वे एक मध्यवर्गीय कायस्थ परिवार में से थे। कृष्ण बल्लभ सहाय ने पटना और हजारी बाग से अपनी शिक्षा ग्रहण की। जब वे कानून की शिक्षा प्राप्त कर रहे थे तो उन्होंने उसे छोड़ दिया।


🙋🏻‍♂️ *आंन्दोलनों में योगदान*

कृष्ण बल्लभ सहाय 1920 के असहयोग आन्दोलन में शामिल हो गए। सन 1923 में सहाय ने समाज पार्टी के मंत्री के रूप में बिहार विधान परिषद में प्रवेश किया। सविनय अवज्ञा आन्दोलन में दौरान उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। कृष्ण बल्लभ सहाय ने स्वामी सहजानंद द्वारा चलाए गये किसान आन्दोलन में सक्रिय रूप से सहयोग किया था।


⚜️ *बिहार के भूतपूर्व मुख्यमंत्री*

के. बी. सहाय ने बिहार में मंत्रीय पद प्राप्त किया और सन 1963 में बिहार के मुख्यमंत्री नियुक्त हुए।


🪔 *मृत्यु*

कृष्ण बल्लभ का निधन 3 जून, 1974, को हजारीबाग, झारखण्ड में हो गया|    


      

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